27 March 2026
“ट्राईबल टू ग्लोबल”….की मिसाल बनीं यास्मीन अंसारी, मास्टरशेफ़ में जीता जजेस का दिल……छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत को आधुनिक पाक कला के साथ जोड़ते हुए मास्टरशेफ़ के मंच पर बनाई अपनी एक पहचान
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“ट्राईबल टू ग्लोबल”….की मिसाल बनीं यास्मीन अंसारी, मास्टरशेफ़ में जीता जजेस का दिल……छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत को आधुनिक पाक कला के साथ जोड़ते हुए मास्टरशेफ़ के मंच पर बनाई अपनी एक पहचान

Sarguja express….

(दीपक सराठे )

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत को आधुनिक पाक कला के साथ जोड़ते हुए यास्मीन अंसारी ने मास्टरशेफ़ के मंच पर अपनी एक अलग पहचान बना ली है। एक साधारण गृहिणी और होम शेफ के रूप में शुरुआत करने वाली यास्मीन आज अपनी अनोखी सोच और क्रिएटिव कुकिंग के दम पर सुर्खियों में हैं। उनकी यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाती है कि प्रतिभा किसी बड़े मंच की मोहताज नहीं होती।
यास्मीन मूल रूप से छत्तीसगढ़ से हैं और वर्तमान में बेंगलुरु में निवास करती हैं। उनकी कुकिंग में स्थानीय ट्राइबल इंग्रीडिएंट्स का उपयोग और उन्हें आधुनिक तकनीकों के साथ प्रस्तुत करना उनकी सबसे बड़ी खासियत है। यही विशेषता उन्हें अन्य प्रतियोगियों से अलग बनाती है।
यास्मीन की मास्टरशेफ़ यात्रा नवंबर माह में शुरू हुई, जब उन्हें शो की क्रिएटिव टीम से कॉल प्राप्त हुआ। दरअसल, उन्होंने पिछले वर्ष भी ऑडिशन दिया था और चयनित भी हो गई थीं, लेकिन उस समय शो रद्द हो गया था। इस बार उन्हें फिर से मौका मिला और उन्होंने इसे पूरी तैयारी के साथ अपनाया।


9 नवंबर को वह हैदराबाद ऑडिशन के लिए पहुँचीं और 10 नवंबर को अपने भाई के साथ ऑडिशन दिया। दो राउंड में उन्होंने अपने स्वाद और तकनीक से जजेस को प्रभावित किया। इसके बाद 18 नवंबर को उन्हें मुंबई के लिए बुलाया गया, जहाँ उन्होंने दो और राउंड सफलतापूर्वक पार किए।
मुंबई में ही एक होटल मैनेजमेंट संस्थान में आयोजित एक घंटे के कुकिंग राउंड में भी यास्मीन ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद वह बेंगलुरु लौट आईं, लेकिन उनकी यात्रा यहीं खत्म नहीं हुई। जल्द ही उन्हें फाइनल मेगा ऑडिशन के लिए दोबारा मुंबई बुलाया गया।
फाइनल राउंड में यास्मीन को एक सेवरी और एक स्वीट डिश तैयार करनी थी, लेकिन प्रेजेंटेशन के लिए एक ही डिश चुननी थी। इस चुनौती को उन्होंने अपनी अनूठी सोच से खास बना दिया।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के ट्राइबल इंग्रीडिएंट्स को इंटरनेशनल स्टाइल में पेश करते हुए एक बेहद एडवांस डिश तैयार की। इसमें बकवीट से बनी फिलो पेस्ट्री, महुआ का जैम, लकड़ा फूल का सॉरबे, गोभी का पन्ना कोटा, पलाश के फूल से बना बटरफ्लाई एलिमेंट और रेड ऐंट का रिवर्स स्फेरिफिकेशन शामिल था।
यह डिश न केवल स्वाद में बेहतरीन थी, बल्कि तकनीकी रूप से भी अत्यंत जटिल और आधुनिक थी। जजेस ने इसे “मिशलिन ग्रेड” तक का दर्जा दिया।

 

जजेस की सराहना और बड़ी उपलब्धि

यास्मीन की प्रस्तुति ने जजेस को खासा प्रभावित किया। उन्होंने फ्लेवर कॉम्बिनेशन, प्लेटिंग और इनोवेशन की खुलकर तारीफ की। जजेस ने कहा, “अब समय आ गया है ट्राईबल टू ग्लोबल
का, जो यास्मीन के विजन को दर्शाता है।
उनकी शानदार कुकिंग स्किल्स और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर जजेस ने यास्मीन और उनके भाई महफूज़—दोनों को मास्टरशेफ़ का प्रतिष्ठित एप्रन प्रदान किया। यह न केवल उनके चयन का प्रतीक है, बल्कि उनके सपनों की बड़ी उपलब्धि भी है।

प्रेरणा बनीं यास्मीन

यास्मीन अंसारी की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर जुनून और मेहनत सच्ची हो, तो साधारण से असाधारण तक का सफर तय किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध ट्राइबल फूड संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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