Sarguja express….
अंबिकापुर। अंबिकापुर स्थित संजय पार्क रेस्क्यू सेंटर में 15 हिरणों की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच और दोषी वन अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में संजय पार्क रेस्क्यू सेंटर में आवारा कुत्तों के हमले से 15 हिरणों की मौत हो गई थी। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परवेज आलम गांधी ने अपने पत्र में कहा है कि यह घटना वन विभाग की लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है, जहां सुरक्षा, निगरानी और आवश्यक व्यवस्थाओं में भारी चूक हुई है।
उन्होंने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि निर्दोष वन्यजीवों की इस तरह मौत न केवल वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं को भी आहत करने वाली घटना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, उन्होंने भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
इधर, मुख्यमंत्री सचिवालय ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक, रायपुर को पत्र प्रेषित किया है। अवर सचिव मुकेश कुमार गोंड द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि परवेज आलम गांधी द्वारा प्रस्तुत आवेदन का अवलोकन कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सचिवालय ने निर्देश दिए हैं कि मामले में की गई कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराया जाए और पूरी प्रक्रिया की संक्षिप्त जानकारी जनदर्शन पोर्टल पर दर्ज की जाए। साथ ही, कार्रवाई से संबंधित अभिलेख भी पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया है।
इस घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार भी इस मामले को गंभीरता से ले रही है। वन विभाग पर अब जांच और जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है।
स्थानीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है। वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने भी घटना की निंदा करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और दोषियों पर किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है। यह मामला न केवल वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

